आइये विचार करें,
मांसाहार क्यों नहीं?
ऐसा हम सबने पढ़ा है कि हमारी भूँख के लिए हमारे शरीर के अंदर की जठराग्नि जिम्मेदार होती
है।यह जितनी प्रबल होती है हमारी भूँख भी उतनी ही प्रबल होती है।उस वक्त हम जैसा भोजन करते हैं वैसा ही हमारा मन और शरीर होता है।
अगर हम अग्नि में मांस डालेंगे तो वहां का दृश्य क्या होगा ,और अगर हम अग्नि में फल, फूल,पत्ते,केसर,आदि डालेंगे तो वहाँ का दृश्य कैसा होगा,यह कल्पना हम स्वयं कर सकते हैं।
अब यह हम खुद तय करें कि हमें अपने शरीर के जठराग्नि रूपी अग्नि में क्या डालकर अपने शरीर को यज्ञशाला बनाना है या श्मशान।
हमें विचार करना चाहिए कि महाराणा प्रताप जंगल में रहकर भी घास की रोटी क्यों खाते थे,वहाँ तो मांस की कोई कमी न थी,,,,,सोचिये?
अपनी प्रकृति को पहचाने ,और उसके अनुकूल रहें।
🌲🌳🌱🌴🌳🌲🌱🍁🍀☘️🌿🌾🌷🌻🥀
मांसाहार क्यों नहीं?
ऐसा हम सबने पढ़ा है कि हमारी भूँख के लिए हमारे शरीर के अंदर की जठराग्नि जिम्मेदार होती
है।यह जितनी प्रबल होती है हमारी भूँख भी उतनी ही प्रबल होती है।उस वक्त हम जैसा भोजन करते हैं वैसा ही हमारा मन और शरीर होता है।
अगर हम अग्नि में मांस डालेंगे तो वहां का दृश्य क्या होगा ,और अगर हम अग्नि में फल, फूल,पत्ते,केसर,आदि डालेंगे तो वहाँ का दृश्य कैसा होगा,यह कल्पना हम स्वयं कर सकते हैं।
अब यह हम खुद तय करें कि हमें अपने शरीर के जठराग्नि रूपी अग्नि में क्या डालकर अपने शरीर को यज्ञशाला बनाना है या श्मशान।
हमें विचार करना चाहिए कि महाराणा प्रताप जंगल में रहकर भी घास की रोटी क्यों खाते थे,वहाँ तो मांस की कोई कमी न थी,,,,,सोचिये?
अपनी प्रकृति को पहचाने ,और उसके अनुकूल रहें।
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